परिचय
सरना बाल विकास उच्च विद्यालय, रांची (झारखंड) के चान्हो प्रखंड के पोडा़टोली क्षेत्र में स्थित एक प्रतिष्ठित एवं सामाजिक दायित्वों से प्रेरित शैक्षणिक संस्थान है। यह विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों, विशेषकर आदिवासी समुदाय के बच्चों के जीवन को संवारने का एक सशक्त माध्यम है।
संस्थापक प्रेरणा (Founding Inspiration)
इस विद्यालय की स्थापना समाजसेवा और शिक्षा के प्रति समर्पित महान व्यक्तित्वों द्वारा की गई, जिनकी दूरदर्शिता और समर्पण आज भी संस्थान की नींव को सुदृढ़ बनाए हुए है।
- संस्थापक सचिव (स्वर्गीय): श्री चारो उरांव
- संस्थापक प्रधानाध्यापक (स्वर्गीय): श्री महादेव उरांव
- भूमि दाता (स्वर्गीय): श्री बुधवा उरांव
इन्होंने ने ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर शिक्षा का महत्व समझाया और बच्चों के विकास के लिए कार्य किया। उनके प्रयासों से विद्यार्थियों एवं विद्यालय दोनों का समुचित विकास हुआ।
इन्हीं महान व्यक्तित्वों के अथक प्रयास, त्याग और समर्पण के फलस्वरूप इस विद्यालय की स्थापना हुई और शिक्षा की यह ज्योति आज भी निरंतर समाज को आलोकित कर रही है।
हमारी सोच (Our Social Vision)
हम मानते हैं कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है।
हमारा लक्ष्य है:
- प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना
- समाज के पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ना
- विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, संस्कार एवं नेतृत्व क्षमता विकसित करना
- शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना
हमारा उद्देश्य (Mission & Commitment)
विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अकादमिक रूप से सक्षम बनाना नहीं, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार, जागरूक एवं संस्कारित नागरिक के रूप में विकसित करना है।
विद्यालय की प्रमुख जानकारी
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शिक्षकों की संख्या — 16
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शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की संख्या — 02
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विद्यार्थियों की वर्तमान संख्या — 451
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अब तक उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या — 1555
अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद् – एक परिचय
अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद् की स्थापना वर्ष 1967-68 में स्वर्गीय कार्तिक उरांव जी द्वारा की गई थी। परिषद् का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास हेतु शिक्षा, भाषा, धर्म, संस्कृति एवं सामाजिक जागरूकता का संरक्षण एवं संवर्धन करना है।
परिषद् निरंतर प्रयासरत है कि आदिवासी समाज के आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ा जाए और उन्हें विकास के समान अवसर प्राप्त हों।
शिक्षा संस्थान एवं शैक्षणिक पहलl
अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद् द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की गई है।
वर्तमान में परिषद् के अंतर्गत:
- 2 महाविद्यालय
- 5 उच्च विद्यालय
- 5 मध्य विद्यालय
- 14 प्राथमिक विद्यालय
इन संस्थानों में हजारों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं तथा परीक्षा परिणाम लगभग 99% तक संतोषजनक रहता है।
प्रशिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रम
समाज को आत्मनिर्भर बनाने हेतु विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं:
- साक्षरता प्रशिक्षण
- विज्ञान एवं गणित प्रशिक्षण
- कौशल विकास प्रशिक्षण
- ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण
- तीरंदाजी (पारंपरिक खेल) प्रशिक्षण
- सांस्कृतिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु विद्यालय में विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं:
- राष्ट्रीय पर्व (स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस)
- वाद-विवाद, निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिताएं
- खेलकूद (फुटबॉल, हॉकी, एथलेटिक्स)
- नृत्य, संगीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
इनसे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता एवं सामाजिक सहभागिता की भावना विकसित होती है।
सामाजिक एवं जनजागरूकता पहल
एवं विद्यालय समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं:
- नशा उन्मूलन अभियान
- महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम
- किसान जागरूकता अभियान
- पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण
निष्कर्ष
सरना बाल विकास उच्च विद्यालय एवं अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद् शिक्षा, संस्कृति एवं समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य करते हुए आदिवासी समाज के उत्थान के लिए समर्पित हैं।
हमारा उद्देश्य है कि प्रत्येक विद्यार्थी:
- शिक्षित बने
- संस्कारित बने
- आत्मनिर्भर बने
- तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाए
हमारी पहचान
सरना बाल विकास उच्च विद्यालय
शिक्षा, संस्कार और संस्कृति का संगम
अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद्
शिक्षा, संस्कृति और समाज सेवा – यही हमारी पहचान है